अमेरिका के विदेशों में आक्रमण युद्धों से गंभीर मानवीय आपदाएं पैदा हुईं

अमेरिका के विदेशों में आक्रमण युद्धों से गंभीर मानवीय आपदाएं पैदा हुईं

बीजिंग, | चीनी मानवाधिकार अनुसंधान सोसायटी ने 9 अप्रैल को ‘अमेरिका के विदेशों में आक्रमण युद्धों ने गंभीर मानवीय आपदाओं को जन्म दिया’ शीर्षक लेख प्रकाशित किया। जिसमें अमेरिका द्वारा मानवाधिकार हस्तक्षेप की आड़ में विदेशों में बल प्रयोग वाली कार्रवाई का खुलासा किया गया और कहा गया कि इन युद्धों में न केवल बड़ी संख्या में सैनिकों ने जान गंवाई, बल्कि आम नागरिकों और संपत्ति का भारी नुकसान हुआ, और साथ ही साथ गंभीर मानवीय आपदाएं भी पैदा हुई। लेख में द्वितीय विश्व युद्ध के बाद अमेरिका द्वारा शुरू किए गए आक्रामण युद्धों की एक सूची जारी की गई है। अपूर्ण आंकड़ों के अनुसार, द्वितीय विश्व युद्ध के अंत से 2001 तक, दुनिया के 153 क्षेत्रों में हुए 248 सशस्त्र संघर्षों में 201 की शुरूआत अमेरिका ने की। इसके अलावा, अमेरिका ने छद्म युद्ध का समर्थन करने, घरेलू विद्रोह, गुप्त हत्या, हथियार और गोला-बारूद प्रदान करने, सरकार विरोधी ताकतों को प्रशिक्षित करने जैसे तरीकों से दूसरे देशों में हस्तक्षेप किया। जिससे संबंधित देशों की सामाजिक स्थिरता और सार्वजनिक सुरक्षा को गंभीर नुकसान पहुंचा है।

लेख में बल देते हुए कहा गया कि अमेरिका द्वारा शुरू किए गए विदेशी युद्ध की वजह से गंभीर खराब परिणाम पैदा हुए, बड़ी संख्या में लोग हताहत हुए, सुविधाओं का विनाश हुआ और उत्पादन ठप हो गया। इसके साथ ही शरणार्थियों, सामाजिक अशांति, पारिस्थितिकी संकट और मनोवैज्ञानिक आघात जैसी सिलसिलेवार सामाजिक समस्याएं भी पैदा हुईं।

लेख में यह भी कहा गया कि सैन्य अभियानों से पैदा मानवीय संकट अमेरिका की आधिपत्यवाद विचारधारा से उपजा है। यदि अन्य देश मानवाधिकार की रक्षा के लिए आधिपत्यवादी देश पर निर्भर रहे, तो यह बाघ के शरीर से खाल निकालने की कोशिश जैसा होगा। केवल स्वार्थ आधिपत्यवादी विचारधारा को छोड़ कर ही मानवीय आपदाओं से बचा जा सकता है। पारस्परिक लाभ और उभय जीत हासिल की जा सकती है, और सभी देशों के लोग वास्तव में बुनियादी मानवाधिकारों का आनंद ले सकते हैं।

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