यूएन के नियमों का पालन करना सभी देशों की जिम्मेदारी

यूएन के नियमों का पालन करना सभी देशों की जिम्मेदारी

बीजिंग, | द्वितीय विश्व युद्ध के बाद 51 देशों ने संयुक्त राष्ट्र चार्टर पर हस्ताक्षर किये और संयुक्त राष्ट्र संघ के संस्थापक देश बने। संयुक्त राष्ट्र चार्टर 24 अक्तूबर, 1945 को औपचारिक तौर पर प्रभावी हुआ। पिछले 75 सालों से संयुक्त राष्ट्र संघ विश्व शांति और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। इस साल पूरी दुनिया कोविड-19 महामारी का सामना कर रही है। बड़े परिवर्तन और वैश्विक चुनौती की स्थिति दुनिया को पहले से बहुपक्षवाद की कहीं ज्यादा जरूरत है।

संयुक्त राष्ट्र संघ के ताजा आंकड़ों के अनुसार, 30 सितंबर तक यूएन के सदस्य देशों ने 1 अरब है कि अमेरिका ने 1 अरब 9 करोड़ डॉलर की सदस्यता शुल्क जमा नहीं की है। भुगतान न किया जाने वाला स्थापना संबंधी खर्च कुल 2 अरब 55 करोड़ 70 लाख डॉलर है, जिसमें 1 अरब 38 करोड़ 80 लाख डॉलर अमेरिका को देना है।

हम सब जानते हैं कि वित्त संयुक्त राष्ट्र शासन का आधार है। स्थिर वित्तीय स्थिति संयुक्त राष्ट्र के काम की गारंटी है। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने कई बार आशा जताई कि अमेरिका शीघ्र ही बकाया राशि को जमा करेगा, ताकि यूएन की दिन प्रति दिन गंभीर हो रहे वित्तीय संकट का समाधान हो सके। लेकिन अब तक अमेरिका ने सदस्यता शुल्क का भुगतान नहीं किया है।

अमेरिका ने करीब 1 अरब डॉलर की सदस्यता शुल्क अदा नहीं की, जबकि एक साल में अमेरिका का सैन्य खर्च 7 खरब डॉलर से अधिक है। मतलब है कि यूएन की सदस्यता शुल्क न देने का कारण पैसों की तंगी कतई नहीं है।

संयुक्त राष्ट्र संघ का दूसरा बड़ा सदस्यता शुल्क देश होने के नाते चीन हमेशा से अपनी जिम्मेदारी निभाता है। कूटनीतिक नीति की ²ष्टि से देखा जाए, तो चीन सभी अंतर्राष्ट्रीय और क्षेत्रीय मामलों में हमेशा निष्पक्ष और न्यायपूर्ण रुख अपनाता है, न कि अपने राजनीतिक हित के अनुसार काम करता है।

इसके साथ, चीन हमेशा से यूएन के सभी नियमों का ²ढ़ता से पालन करता है। शुरू में चीन सबसे गरीब विकासशील देश था, लेकिन अब दुनिया की दूसरी बड़ी आर्थिक शक्ति बन चुका है। संयुक्त राष्ट्र संघ में चीन की सदस्यता शुल्क भी कम से ज्यादा में बदल गयी। चाहे पहले हो या अब, चीन हमेशा से समय पर और नियत लक्ष्य से सदस्यता शुल्क अदा करता है।

इसलिए कहा जा सकता है कि अंतर्राष्ट्रीय मामलों में और यूएन के नियमों के कार्यांवयन में चीन ने एक अच्छा उदाहरण कायम किया है।

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